दिल से सुकून निकाल के रख दूंगा मगर

दिल से सुकून निकाल के रख दूंगा मगर
यकीन करना तो आता नहीं तुम्हें ||

फर्माइश होगी आसमान की हमेशा तुम्हारी
लेकिन आसमान में उड़ना तो आता नहीं तुम्हें ||

हर दिन और हर रात तुम पुकारते हो नफरत से 
हमें यकीन है कि अभी ठीक से नफरत आती नहीं तुम्हें ||

माना कि मैं शायर और कवि नहीं हूँ 
लेकिन मुझसे ज्यादा सच्चाइयों को लिखना आता नहीं तुम्हें  ||

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